बिहार में तैनात एक कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक पर भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति जुटाने के गंभीर आरोप लगे हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इस पूरे मामले की जांच कर रही है और अब इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की तैयारी है।

बताया जा रहा है कि मनोज रजक, जो नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर तैनात हैं, ने नौकरी के करीब 17 साल के दौरान बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक में बड़ी संपत्ति बनाई है। फिलहाल उनकी पोस्टिंग मधुबनी जिले के जयनगर में है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कभी आर्थिक रूप से कमजोर रहे मनोज ने इंजीनियरिंग पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था, लेकिन सरकारी नौकरी मिलने के बाद उन्होंने तेजी से अपनी आर्थिक स्थिति बदली। आरोप है कि उन्होंने अपनी वास्तविक संपत्ति का पूरा ब्योरा सरकार को नहीं दिया। EOU की जांच में अब तक बिहार में कई संपत्तियों का पता चला है। साथ ही, सिलीगुड़ी में चाय बागान और काठमांडू समेत नेपाल के अन्य इलाकों में निवेश के संकेत मिले हैं। इन विदेशी संपत्तियों की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के माध्यम से इंटरपोल से सहयोग लिया जा रहा है।

16 मार्च को EOU ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की और इसके बाद कई ठिकानों पर छापेमारी की गई। छापों में करोड़ों रुपये की संपत्ति और कई जमीनों के दस्तावेज मिले हैं। मामले में आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका भी जताई जा रही है, जिसके चलते आगे चलकर प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री भी हो सकती है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, ठेकेदारों से कमीशन, बिजली कनेक्शन और मीटर से जुड़े कामों में रिश्वतखोरी जैसे कई तरीकों से अवैध कमाई की गई। विभागीय फैसलों में भी अनियमितताओं की जांच की जा रही है। इस मामले में मनोज रजक के करीबी रिश्तेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसी का मानना है कि अवैध धन को वैध बनाने के लिए परिवार के सदस्यों के नाम का इस्तेमाल किया गया। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले समय में पूछताछ, वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल और अन्य एजेंसियों के सहयोग से इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।