बिहार में जाति, ज़मीन और जनता का ज्वालामुखी फूटेगा! प्रशांत किशोर ने सरकार को दी सीधी चुनौती

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
पटना :
पटना के गांधी मैदान को भरने की चुनौती में सफलता नहीं मिलने के बावजूद जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर हार मानाने को तैयार नहीं.उनका आरोप है कि जान बुझकर एक सोची समझी शाजिश के तहत उनके समर्थकों को गांधी मैदान तक नहीं पहुँचने दिया गया.अब इस चुनौती को अवसर में बदलने के लिए कल से प्रशांत किशोर जिलों में रैली करने जा रहे हैं.उनका कहना है कि सरकार ने उनतक उनके लोगों को पहुँचने से रोक दिया तो अब वो खुद अपने लोगों तक पहुचेगें.

प्रशांत किशोर जनता के बीच तीन बड़े मुद्दे को लेकर जा रहे हैं. पहला मुद्दा है जातिगत गणना.प्रशांत किशोर ने कहा, ‘जातिगत गणना को लेकर बिहार में खूब सियासत हुई है. जिन लोगो ने ये कराया उनकी मंशा जनता की मदद करना नहीं बल्कि समाज को जातीय झंझट में डाल राजनीतिक फायदा उठाने की थी. जातिगत गणना के बाद सरकार ने पांच महत्वपूर्ण बातें कही थीं. तीस साल से ज़्यादा समय तक लालू नीतीश ने राज किया. बावजूद समाज के पिछड़े और दलित पिछड़े ही रह गए. चाहे शिक्षा की बात हो या सरकारी नौकरी में आने की. जब जातिगत गणना हुआ तब सरकार ने आरक्षण का दायरा बढ़ाने के फैसला के लिए केंद्र को लिखा था. उसकी वर्तमान में स्थिति क्या है.’

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प्रशांत किशोर ने कहा, ’94 लाख परिवार को रोजगार के सहायता के लिए प्रति परिवार के किस्त के आधार पर दो-दो लाख देने की बात थी. कितने परिवार को अभी तक पैसा मिला. 39 लाख परिवार को जिनके पास घर नहीं है. उन्हें एक लाख 20 हज़ार रुपया दिया जाएगा. कितने परिवार जो अभी तक ये राशि दी गई है. पूरी सरकारी मशीनरी प्रधानमंत्री के दौरे को सफल बनाने के लिए लगी हुई है.

प्रशांत किशोर ने कहा, ‘नीतीश कुमार ने घोषणा किया था कि 2006 में की हर ग़रीब दलित को तीन डिसमल जमीन दिया जाएगा. लेकिन अभी तक कितने लोगों को मिला इसकी जानकारी दे नीतीश सरकार. पचास लाख ऐसे परिवार जो महादलित समाज से आते है, उनके से मात्र दो लाख से कुछ ज़्यादा परिवार को अभी तक जमीन दिया गया है. बाक़ी अभी भी बिना जमीन और मकान के हैं.’

‘बिहार में जमीन सर्वे का काम भी काफ़ी धीमा चल रहा है. अभी भी अस्सी प्रतिशत से ज़्यादा लोगो का ना तो जमीन सर्वे हुआ और ना ही जमीन का डिजिटिलाइजेशन हुआ है. जमीन सर्वे की वजह से घर घर में विवाद बढ़ गया है. बिहार में जमीन विवाद की वजह से लगभग साठ प्रतिशत हत्या हो रही है. बिहार में जमीन सर्वे में काफ़ी धांधली हुई है. सीओ जमकर पैसा कमा रहा है.

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