सिटी पोस्ट लाइव : बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार की देर रात करीब 11 बजे मगध अस्पताल के मालिक और बड़े उद्योगपति गोपाल खेमका की हुई हत्या ने बिहार को हिलाकर रख दिया है.पनाश होटल के पास उनके अपार्टमेंट के बाहर अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी. अपनी गाड़ी से उतरते ही घात लगाए हमलावरों ने खेमका पर हमला कर दिया.. गोली उनके सिर में मारी गई जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. हत्या की इस बड़ी घटना को पटना के गांधी मैदान थाना से महज 500 मीटर दूरी पर अंजाम दिया गया फिर भी पुलिस वारदात के डेढ़ घंटे बाद घटना स्थल पर पहुंची.
इस हत्याकांड ने बिहार में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं खासकर तब जब हाल के महीनों में कई बड़े व्यापारियों को निशाना बनाया गया है.इसके साथ ही पुलिस का लापरवाह कार्यशैली को लेकर भी कई सवाल हैं.दरअसल, गोपाल खेमका की हत्या कोई पहली घटना नहीं है. वर्ष 2025 में बिहार में बड़े व्यापारियों और व्यवसायियों को टारगेट मर्डर की संख्या में वृद्धि हुई है जाहिर तौर पर यह बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मुद्दा बन चुका है.बिहार में रंगदारी एक बड़ा मुद्दा रहा है जहां अपराधी बड़े व्यवसायियों से मोटी रकम की उगाही करते हैं. जो कारोबारी इसका विरोध करते हैं उन्हें अक्सर निशाना बनाया जाता है. इसके अलावा कुछ मामलों में व्यक्तिगत रंजिश और संपत्ति विवाद भी हत्याओं का कारण बन रहे हैं.इसके अतिरिक्त कुछ अन्य छोटे-मोटे व्यवसायियों की हत्याएं भी हुई हैं..
विपक्ष के राजनीतिक दलों से लेकर आम लोग भी अब सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं और ‘जंगलराज’ की वापसी करार दे रहे हैं. पटना जैसे शहर में जहां पुलिस मुख्यालय और प्रशासनिक केंद्र मौजूद हैं, पटना डीएम का आवास और थाना की दूरी घटना स्थल से महज 500 मीटर दूरी पर है, वहां ऐसी घटनाएं होना गंभीर चिंता का विषय है.गोपाल खेमका की हत्या और 2025 में अन्य व्यवसायियों पर हमले बिहार में बढ़ते अपराध का एक खतरनाक संकेत हैं. यह न केवल कानून व्यवस्था की विफलता को बता रहा है, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति पर भी असर डाल सकता है.
लगातार हत्याओं ने बिहार के व्यापारी समुदाय में डर का माहौल पैदा कर दिया है. कई व्यवसायी अब खुले तौर पर अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. बिहार पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि वे सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं. जाहिर है अगर व्यापारी सुरक्षित नहीं होंगे तो निवेश और कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है. ऐसे में सरकार और पुलिस को इस दिशा में तत्काल और ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि अपराधियों में डर पैदा हो और व्यापारी समुदाय में विश्वास बहाल हो.