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बिहार के जमुई, लखीसराय और मुंगेर के पहाड़ी इलाकों में पिछले दो दशकों से दहशत फैलाने वाले कुख्यात नक्सली सुरेश कोड़ा ने आखिरकार पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। भाकपा (माओवादी) के इस स्पेशल एरिया कमांडर ने बुधवार सुबह भारी मात्रा में आधुनिक हथियारों और कारतूसों के साथ आत्मसमर्पण किया। सुरेश कोड़ा पर बिहार सरकार ने तीन लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था और वह सुरक्षा बलों की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में शामिल था।
25 साल का खूनी इतिहास और 50 से ज्यादा मुकदमे
सुरेश कोड़ा संगठन में रीजनल या केंद्रीय कमेटी का सदस्य माना जाता था। पिछले 25 वर्षों से वह नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, लेवी (रंगदारी), विस्फोटक अधिनियम और आर्म्स एक्ट के तहत 50 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। वह न केवल बिहार, बल्कि झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में भी पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।
सुरेश कोड़ा के जघन्य अपराधों का लेखा-जोखा
सुरेश कोड़ा का आपराधिक इतिहास बेहद खौफनाक रहा है। उसके कुछ प्रमुख कारनामे इस प्रकार हैं:
2008: धरहरा थाना क्षेत्र में एक चौकीदार की बर्बरता से गला काटकर हत्या।
2012: खैरा में सरकारी कार्यालय में विस्फोट, कागजात जलाने और ट्रकों में आगजनी की घटना।
2017: लखीसराय के कजरा में एक मुखिया की सरेआम हत्या।
2018: जमुई में दो भाइयों और एक महिला की गला रेतकर हत्या।
जवानों पर हमला: 2018 में एक एसएसबी (SSB) जवान की हत्या और एसटीएफ के साथ कई मुठभेड़ों में शामिल।
विकास कार्यों में बाधा: झील निर्माण कार्य में लगे 7 वाहनों को आग के हवाले करना और लेवी के लिए ठेकेदारों को डराना।
पहाड़ों का ‘गुरिल्ला’ अब सलाखों के पीछे
सुरेश कोड़ा को पहाड़ी इलाकों में गुरिल्ला युद्ध का विशेषज्ञ माना जाता था। एक बार वह एसटीएफ (STF) के घेरे में फंस गया था, लेकिन एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग करते हुए पहाड़ियों का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहा था। सरेंडर के समय उसके पास से एके-47, एके-56, कई मैगजीन और सैकड़ों कारतूस बरामद किए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सुरेश कोड़ा के सरेंडर करने से नक्सली संगठन की कमर टूट गई है। इससे आने वाले समय में मुंगेर और जमुई के इलाकों में नक्सली नेटवर्क को ध्वस्त करने में बड़ी मदद मिलेगी।