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कुछ दिन पहले सर्वोच्च न्यायालय में ‘एज ऑफ कसेंट’ घटाने को लेकर सीनियर वकील की तरफ से याचिका दायर की गई। लेकिन सरकार इसके पक्ष में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने इस मामले पर दोनों पक्षों से दलीलें मांगी है और गंभीरता से विचार करने का संकेत दिया है। आइए आपको बताते है ये एज ऑफ कसेंट क्या है और सरकार इसके विरोध में क्यों है।
दरअसल, 24 जुलाई को सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह ने ‘एज ऑफ कसेंट’ घटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि सहमति से सेक्स की न्यूनतम उम्र 18 से घटाकर 16 साल कर देना चाहिए। क्योंकि इस उम्र में किशोर यौन संबंधों के बारे में समझदारी से फैसला ले सकते हैं। लेकिन सरकार इसका पूरी तरह से विरोध कर रही है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दलीलें पेश की। उन्होंने इस याचिका को खारिज करने की मांग की। और कहा ‘एज ऑफ कसेंट’ 18 ही होना चाहिए। इसे घटाने से यौन शोषण, बाल विवाह और मानव तस्करी का खतरा बढ़ सकता है। नाबालिगों की सहमति की गलत उपयोग हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता ने इस केस को सुना। वहीं, बेंच ने खारिज न करते हुए इस मामले में दोनों पक्षों से दलीलें पेश करने को कहा है। वैसे एज ऑफ कसेंट मतलब वह न्यूनतम उम्र, जिसके बाद किसी व्यक्ति को कानूनी रूप से सहमति देकर यौन संबंध बनाने की अनुमति होती है। भारत की पॉक्सो एक्ट और बीएनएस की धारा 63 के तहत सेक्स करने की न्यूनतम उम्र 18 साल है। यानि अगर कोई व्यक्ति 18 साल से कम उम्र का है, तो उसकी सहमति से बना कोई भी यौन संबंध कानूनी तौर पर बलात्कार माना जा सकता है, भले ही वह सहमति से ही क्यों न हो। वहीं, BNS की धारा 63 में एक अपवाद है कि अगर कोई पुरुष अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाता है और पत्नी की उम्र 15 साल से ज्यादा है, तो यह रेप नहीं माना जाता, भले ही संबंध असहमति से बने हों। लेकिन अगर पत्नी 15 साल से कम उम्र की है तो यह रेप माना जाता है। इसमें 2 साल की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकती है। पॉक्सो एक्ट के धारा 3 के तहत अगर कोई व्यक्ति 18 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ सहमति या असहमति से यौन संबंध बनाता है, तो इसे पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट माना जाता है। इसमें कम से कम 10 साल की सजा मिलती है, जो उम्रकैद तक में बढ़ाई जा सकती है।
हालांकि, एज ऑफ कसेंट 18 साल से 16 साल की घटाने की मांग के पीछे 2 बड़े तर्क है:-
पहला, WHO के मुताबिक, यौवन आमतौर पर 10-14 साल में शुरू होता है और 16-18 साल तक किशोर यौन जारूकता विकसित कर लेते हैं। इस उम्र में हार्मोनल चेंजेस टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन को बढ़ा देते हैं, जिससे सेक्स करने की जरूरत महसूस होती है। दूसरा, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के मुताबिक भारत में 39% लड़कियों ने 18 साल से पहले यौन संबंध बनाए, जिनमें से कई सहमति से बने थे। लेकिन भारत में इसे अपराध माना जाता है। तीसरा, 2023 में 22वें लॉ कमीशन ने रिपोर्ट में सुझाव दिया कि सहमति से बने रिश्तों में उम्र के अंतर को ध्यान में रखकर कानून में बदलाव किया जाए, ताकि गलत इस्तेमाल न हो। जानकारी के लिए बता दें कि, जर्मनी, कनाडा और मिडिल ईस्ट देश(सऊदी अरब,ईरान,यमन) जैसे देशों में यौन संबंध बनाने की उम्र 18 साल से कम है।