- 90 के दशक की याद दिलाने वाली थी पुलिस की बर्बरता
सिटी पोस्ट लाइव
औरंगाबाद। बिहार के औरंगाबाद जिले के सिंघाड़ी गांव में हाल ही में जो कुछ हुआ, उसने बिहार के उन काले दिनों की याद दिला दी जब रात में गांवों में लोग सोते नहीं थे, पहरेदारी करते थे और हर वक्त डर बना रहता था—कभी नक्सलियों का, तो कभी अपराधियों का। अब लगता है कि उस डर की जगह पुलिस का खौफ ले रहा है। सिंघाड़ी कांड में आधी रात को पुलिस का गांव में यूं घुसना, घरों में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों तक को बेरहमी से पीटना, लोगों को फिर से उसी डर के साये में जीने को मजबूर कर रहा है।
आधी रात में पुलिस का धावा, गांव में मचा तांडव
शनिवार की रात लगभग दो बजे, गोह थाना प्रभारी सुदीश कुमार के नेतृत्व में करीब 40 पुलिसकर्मी सिंघाड़ी गांव में पहुंचे और गांव के भूमिहार समुदाय के हर घर में जबरन घुसकर पिटाई की। महिलाएं, बच्चे, किशोर—कोई भी नहीं बचा। कई लोगों की हड्डियाँ टूटीं, शरीर पर गहरे जख्म हैं, और मानसिक आघात अलग से। इस हमले में गंभीर रूप से घायल होने वालों में संजीत शर्मा, रंजना देवी और उनकी बेटी अदिति कुमारी, रीना देवी, नीतू कुमारी, 15 वर्षीय रितिक रोशन और किशोर कृष्णनंदन कुमार शामिल हैं। प्राथमिक इलाज के बाद सभी को गया के मगध मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

पीड़िता अदिति ने बतीई आपबीती – जानवरों की तरह पीटा, कपड़े उतारने की कोशिश की
सबसे झकझोर देने वाला बयान आया अदिति कुमारी का, जिसने कहा कि पुलिस ने उसके साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया, बिना किसी अपराध के उसे पीटा गया, और छेड़छाड़ की कोशिश भी की गई। हालांकि, वहां मौजूद एक बुजुर्ग पुलिसकर्मी ने उसे और ज्यादा शर्मिंदगी से बचा लिया। पूरा विवाद दरअसल गांव में एक नाले के निर्माण को लेकर शुरू हुआ था। दो पक्षों के बीच टकराव हुआ, जिसमें पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। दिन में जब पुलिस गांव में आई तो एक पक्ष ने उस पर पक्षपात का आरोप लगाया।
मीडीया और जनप्रतिनिधियों का मिला साथ
इसके बाद शाम तक पुलिस लौट गई, लेकिन आधी रात को वो फिर लौटी और पूरे गांव में तांडव मचा दिया। इस घटना को सिटी पोस्ट लाइव ने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद पूर्व मंत्री रामजतन सिन्हा ने पीड़ितों से मुलाकात की और उन्हें लेकर डीजीपी विनय कुमार से मिले। डीजीपी ने मामले को गंभीरता से लिया और मगध प्रक्षेत्र के आईजी क्षत्रनील सिंह को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। जांच के बाद औरंगाबाद के एसपी अंबरीश राहुल ने SHO सुदीश कुमार को सस्पेंड कर लाइन हाजिर कर दिया। सिटी पोस्ट लाइव से बात करते हुए अदिति ने भावुक होकर कहा, अगर आपका चैनल और रामजतन सिन्हा सर हमारे साथ नहीं होते तो हमें न्याय नहीं मिलता। आप जैसे लोग ही हमारी आवाज़ बनते हैं।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि आईजी की रिपोर्ट के आधार पर अन्य दोषी पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होती है। क्या उन्हें सिर्फ निलंबित किया जाएगा या सेवा से बर्खास्त भी किया जाएगा? बिहार में पुलिस की इस तरह की बर्बरता न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज में भय का माहौल भी पैदा करती है। अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम जनता आखिर किसके पास जाएगी? सवाल ये भी उठता है—क्या अब बिहार के गांवों में फिर से “जागते रहो” की आवाज़ें सुनाई देंगी, इस बार नक्सलियों से नहीं, बल्कि पुलिस से डरकर?