सिटी पोस्ट लाइव
पटना: महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर भक्तजन भगवान शिव की आराधना करते हैं, व्रत रखते हैं और रातभर भजन-कीर्तन में मग्न रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत करने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। हालांकि, शास्त्रों में उपवास और पूजा से जुड़े कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी सुबह 11:08 बजे शुरू होकर 27 फरवरी सुबह 8:54 बजे समाप्त होगी। भगवान शिव की पूजा रात्रि में करने का विशेष महत्व बताया गया है, इसलिए महाशिवरात्रि का उत्सव 26 फरवरी को ही मनाया जाएगा। इस दिन शिव-पार्वती विवाह की खुशी में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
भगवान शिव को जल अर्पण करने की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन यदि इसे सही विधि से न किया जाए, तो पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। यहां कुछ महत्वपूर्ण नियम दिए गए हैं, जिनका पालन करने से शिवजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं—
- शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके खड़े रहना चाहिए। यह दिशा शिव उपासना के लिए शुभ मानी जाती है और इससे महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
- जल चढ़ाते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि जल उत्तर दिशा से शिवलिंग पर गिरे। शास्त्रों के अनुसार, ऐसा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- शिवलिंग पर जल अर्पण करने के तुरंत बाद परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से जल पार करना पड़ता है, जो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निषिद्ध है।
- शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय उत्तर, पश्चिम या पूर्व दिशा की ओर मुख करना उचित नहीं माना जाता। यह दिशाएं भगवान शिव के कंधे और पीठ की प्रतीक मानी जाती हैं, इसलिए इस ओर जल अर्पित करने से पूजा का फल प्राप्त नहीं होता।
- पूजा करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। जल चढ़ाने के लिए तांबे या कांसे के पात्र का उपयोग करना शुभ माना जाता है। अशुद्ध जल या अपवित्र पात्र से अर्पण करने से पूजा का प्रभाव कम हो सकता है।
यदि आप चाहते हैं कि आपकी शिव आराधना सफल हो और महादेव की कृपा आप पर बनी रहे, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें। पूजा की सही विधि अपनाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।