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झुमरीतिलैया। कैलाश राय सरस्वती विद्या मंदिर, झुमरी तिलैया में त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला का शुभारंभ विधिवत संपन्न हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को नवीनतम शैक्षिक नीतियों और शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराना था, जिससे वे विद्यार्थियों को अधिक प्रभावी ढंग से मार्गदर्शन प्रदान कर सकें। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में विद्यालय की स्थानीय समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह, कोषाध्यक्ष नवल कुमार और मुख्य अतिथि के रूप में विद्या भारती के पूर्व विभाग प्रमुख रामावतार साहू उपस्थित रहे। दीप प्रज्वलन और पुष्पार्चन के बाद विद्यालय के प्राचार्य शर्मेंद्र कुमार साहू ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया और कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
शिक्षा नीति और शिक्षण पद्धतियों पर गहन चर्चा
कार्यशाला के प्रथम सत्र में विद्यालय की शैक्षिक मजबूती और चुनौतियों पर विचार-विमर्श हुआ, जिसमें प्राचार्य ने शिक्षकों से उनके सुझाव मांगे। इसके बाद, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस नीति के प्रभावों पर मंथन करते हुए, शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से अवगत कराया गया।
शिक्षा में नवीनतम नवाचारों को शामिल करने की दिशा में, कार्यशाला के दौरान शैक्षिक और सहशैक्षिक पाठ्यक्रमों, संस्कृत संभाषण, सुलेख, एवं मूल्य-आधारित शिक्षा पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान, शिक्षकों को नवाचार आधारित शिक्षण में प्रशिक्षित करने पर बल दिया गया, जिससे विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा मिले।
पाठ्यक्रम क्रियान्वयन और पंचपदी शिक्षण पद्धति
तीसरे सत्र में पाठ्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत मंथन किया गया। शिक्षकों को यह बताया गया कि वे किस प्रकार छात्रों के बौद्धिक और रचनात्मक विकास को सुनिश्चित कर सकते हैं। वहीं, चौथे सत्र में पंचपदी शिक्षण पद्धति पर आचार्य प्रदीप कुमार ने विशेष कक्षा आयोजित की। यह पद्धति छात्रों की भागीदारी बढ़ाने और शिक्षण प्रक्रिया को अधिक रोचक बनाने में सहायक सिद्ध होती है।
शिक्षकों की भूमिका और नैतिक जिम्मेदारियां
अंतिम सत्र में, मातृ संगठन और शिक्षकों की सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई। प्राचार्य ने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि एक शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के निर्माण में भी उसकी अहम भूमिका होती है। इस कार्यशाला में विद्यालय के सभी आचार्य और दीदी की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे यह आयोजन ज्ञानवर्धक और उपयोगी सिद्ध हुआ। कार्यशाला के समापन समारोह में शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए और शिक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए संकल्प लिया।