छठ का असली जन्म कहाँ हुआ? इतिहास के पन्नों से निकला सच!…

Ritu Raj

भारत में छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित सबसे पूजनीय त्योहारों में से एक है। हर साल श्रद्धालु चार दिन का कठोर अनुष्ठान करते हैं जो नहाय-खाय से शुरू होता है। यह अनुष्ठान अर्घ्य और उपवास के साथ जारी रहता है और उगते व डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर समाप्त होता है। इस साल छठ पूजा 25 अक्टूबर से शुरू होगी। आइए जानते हैं छठ पूजा का गौरवशाली इतिहास और सबसे पहले इसकी शुरुआत किसने की थी।

रामायण के अनुसार, छठ पूजा की जड़ें त्रेता युग से जुड़ी हैं। भगवान राम और माता सीता 14 वर्ष के वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे, लेकिन रावण वध के पाप का प्रायश्चित आवश्यक था। मुग्धल ऋषि ने उन्हें शुद्धि के लिए सूर्य देव की उपासना का मार्गदर्शन दिया। माता सीता ने बिहार के मुंगेर में गंगा तट पर 6 दिनों तक कठोर तपस्या की। आज भी मुंगेर का प्रसिद्ध सीता चरण मंदिर माता के पदचिन्हों को संजोए हुए है, जो छठ पूजा का मूल स्रोत माना जाता है। इसके साथ ही महाभारत में भी छठ पूजा का उल्लेख मिलता है। पांडवों ने अपना राजपाट खोने के बाद कष्टों का सामना किया। द्रौपदी ने सूर्य देव की कठोर उपासना की, जिससे पांडवों को राज्य प्राप्ति और संतान का वरदान मिला। यह कथा छठ के चमत्कारी प्रभाव को दर्शाती है। वहीं, कलयुग में भी छठ पूजा का महत्व कम नहीं हुआ। बिहार के देव स्थान (भागलपुर के पास) में एक कुष्ठ रोगी ने श्रद्धापूर्वक छठ व्रत किया। चमत्कारिक रूप से वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में छठ की लोकप्रियता बढ़ाई। हालांकि, पौराणिक कथाओं और परंपराओं में सर्वसम्मति है कि बिहार का मुंगेर जिला छठ पूजा का उद्गम स्थल है। यहीं माता सीता ने प्रथम अनुष्ठान किया था। गंगा के तट पर आज भी लाखों भक्त इकट्ठा होकर उसी परंपरा का पालन करते हैं। यह त्योहार न केवल सूर्य उपासना है, बल्कि प्रकृति, शुद्धता और पारिवारिक एकता का प्रतीक भी है।

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ऐसा माना जाता है कि छठ पूजा की उत्पत्ति त्रेता युग में हुई थी। इस हिसाब से यह रामायण काल जितनी ही प्राचीन है। हालांकि महाभारत काल, कलयुग सहित अलग-अलग युगों की कई पौराणिक कहानियों की वजह से इसकी सटीक आयु को समझ पाना काफी कठिन है।
छठ पूजा सूर्य उपासना की सबसे प्राचीन और कठोर परंपरा है, जो आज भी करोड़ों हृदयों में जीवंत है। त्रेता से लेकर आज तक यह त्योहार शुद्धता, त्याग और आस्था का प्रतीक बना हुआ है।

इस वर्ष का छठ अनुष्ठान:
नहाय-खाय: 25 अक्टूबर
खरना: 26 अक्टूबर
संध्या अर्घ्य: 27 अक्टूबर
उषा अर्घ्य: 28 अक्टूबर

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