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लखीसराय। लखीसराय में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन: क्या उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा बचा रहे हैं लूटेरों को?
लखीसराय जिले में एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध की आवाज उठी है। सोमवार को राजद, कांग्रेस, CPI, CPI(M), और VIP जैसे प्रमुख दलों के कार्यकर्ताओं ने विद्यापीठ चौक से समाहरणालय तक एक भव्य जुलूस निकाला, जिसमें उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और उनके क्षेत्र में चल रहे कथित भ्रष्टाचार को लेकर तीखे आरोप लगाए गए।
विरोध मार्च के दौरान राजद की ओर से पूर्व विधायक फुलेना सिंह, कांग्रेस की ओर से जिलाध्यक्ष अमरेश कुमार अनीश, और CPI के नेता जितेंद्र कुमार सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा विभाग में हुए घोटाले, स्वास्थ्य सेवाओं में अव्यवस्था, और सार्वजनिक योजनाओं में भ्रष्टाचार को उजागर करना था।
शिक्षा विभाग में घोटाले का पर्दाफाश : विरोध करने वाले नेताओं ने लखीसराय जिला शिक्षा पदाधिकारी, शिक्षा विभाग के अभियंता, और ठेकेदारों की एक गठजोड़ पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जून 2024 में शिक्षा विभाग पटना से 534 योजनाओं के लिए बिना टेंडर के वर्क ऑर्डर जारी किए गए। इन योजनाओं की अनुमानित लागत 4 लाख 99 हजार रुपये तक थी, जो बिना किसी काम के बिल तैयार करके लखीसराय ट्रेजरी में भेज दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इन बिलों का भुगतान बिना किसी निर्माण कार्य के किया गया।
यहां तक कि जिन स्कूलों में निर्माण कार्य की कोई झलक भी नहीं दिखी, वहां भी लाखों रुपये की निकासी की गई। विधायक विजय कुमार सिन्हा पर यह आरोप भी लगा कि उनके क्षेत्र में हुए इस भ्रष्टाचार में उनका हाथ हो सकता है। विरोध करने वाले नेताओं ने आरोप लगाया कि यह घोटाला सत्ता संरक्षित ठेकेदारों के माध्यम से किया गया है, और यदि उपमुख्यमंत्री की भूमिका इसमें संलिप्त नहीं है, तो उन्हें इस पर कार्रवाई करनी चाहिए और उन ठेकेदारों की पहचान सार्वजनिक करनी चाहिए।
विधायक कोष और चापाकल वितरण में अनियमितताएं : विरोध के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि विधायक विजय कुमार सिन्हा के विधायक कोष से चापाकल वितरण में भी भारी अनियमितताएं की गईं। चापाकल की कागजों में ही वितरण दिखाया गया, जबकि वास्तव में यह उपकरण स्थापित नहीं किए गए। विरोधी दलों ने इस मामले में भी उपमुख्यमंत्री से जवाब की मांग की है।
क्या विजय बाबू भ्रष्टाचारियों को बचा रहे हैं? : सम्पूर्ण विरोध प्रदर्शन का मूल मुद्दा यह है कि क्या विजय कुमार सिन्हा, जो लखीसराय के विधायक भी हैं, इस घोटाले में शामिल हैं या उन्होंने अपनी भूमिका से नजरअंदाज किया है? अगर उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है, तो क्या वे ठेकेदारों के नाम सार्वजनिक करके इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेंगे?
गौरतलब है कि लखीसराय जिले में 6 महीने में करोड़ों रुपये का फर्जी बिल भुगतान किया गया और बिना काम के सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या बिहार सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने के बजाय, सत्ता संरक्षित लोगों और ठेकेदारों को संरक्षण दे रही है?
इस प्रदर्शन ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही की जरूरत को उजागर किया है। अगर इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता का विश्वास प्रशासन और सरकार से उठ सकता है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के लिए यह एक बड़ा अवसर है कि वे अपनी भूमिका स्पष्ट करें और इस बड़े घोटाले के आरोपों पर तुरंत कार्रवाई करें। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो यह जनता के मन में यह सवाल उठने के लिए मजबूर करेगा कि क्या वे भी इस लूट-खसोट का हिस्सा हैं?