बिहार में एक बार फिर से राजनीतिक मंच पर हलचल मची हुई है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि बिहार न केवल देश का गौरव है, बल्कि पूरे भारत का “गोत्र” भी है। हाल ही में अश्विनी चौबे द्वारा पोस्ट किए गए एक ट्वीट ने इस सवाल को और गहरा कर दिया है, जिसमें उन्होंने लोकतंत्र को “सुचिता और स्वच्छता” का प्रतीक बताया। इसे लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया है।
चौबे ने कहा कि बिहार में लोकतंत्र का उत्सव मनाया जा रहा है, जहां जनता को “विश्वास और स्वच्छता” का सबक सिखाया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है – क्या वास्तव में ऐसा हो रहा है? बिहार की सड़कों पर फैली गंदगी, भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे नेता, और जनता की अनदेखी इस दावे को खोखला साबित करती है। हालांकि, इस ट्वीट में पीएम मोदी, राजनाथ सिंह, जे.पी. नड्डा, योगी आदित्यनाथ जैसे नाम गर्व से लिए गए हैं, लेकिन इन नेताओं की कार्यशैली पर सवाल उठाया गया है। RSS और BJP के झंडे तले बिहार में “लोकतंत्र की हिफाजत” का ढोल पीटा जा रहा है। नितीश कुमार जैसे सहयोगी भी इस नाटक में शामिल हैं, जो अपनी साख को दांव पर लगाते नजर आ रहे हैं।
गौरतलब है कि चौबे का दावा है बिहार में “लोकतंत्र की गर्माहट” महसूस हो रही है। बेरोजगारी, गरीबी, और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर चुप्पी साधे ये नेता आखिर कब तक जनता को सपने दिखाते रहेंगे। वहीं, यह खबर बिहार की सियासत में चल रहे तमाशे को उजागर करती है।