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बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन, नवनिर्वाचित अध्यक्ष के चुनाव के साथ-साथ, लौरिया के विधायक विनय बिहारी के अनोखे अंदाज के कारण चर्चा का विषय बन गया। विधायक विनय बिहारी ने सदन में शपथ लेने से पहले न केवल भोजपुरी में शपथ लेने की अनुमति मांगी, बल्कि जब उन्हें टोका गया तो उन्होंने भोजपुरी की गाथा सुनाकर सदन में मौजूद सभी सदस्यों का ध्यान इस क्षेत्रीय भाषा की ओर आकर्षित किया।
अध्यक्ष चुने गए प्रेम कुमार, माहौल रहा उत्साहपूर्ण
सदन की शुरुआत सोमवार को निर्विरोध चुने गए नए विधानसभा अध्यक्ष, बीजेपी के वरिष्ठ विधायक डॉ. प्रेम कुमार को पदभार सौंपने के साथ हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एक साथ मिलकर प्रेम कुमार को अध्यक्ष की कुर्सी तक छोड़ने पहुंचे, जो सदन में सौहार्द का संदेश था।
इस दौरान सदन में ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्रीराम’ के नारे गूंजते रहे, जिससे माहौल उत्साह से भर गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नए अध्यक्ष प्रेम कुमार को बधाई देते हुए उनके लंबे अनुभव और कामकाज की सराहना की। उन्होंने सभी विधायकों से खड़े होकर नए अध्यक्ष को प्रणाम करने की अपील भी की, जिसे सदन ने एकमत से स्वीकार किया।
शपथ ग्रहण के दौरान विनय बिहारी का भोजपुरी प्रेम
सदन के दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण शपथ ग्रहण समारोह रहा, जिसमें पहले दिन शपथ न ले पाए सात विधायकों में से पाँच ने आज शपथ ली। सबसे पहले मंत्री मदन सहनी ने शपथ ली। इसके बाद जैसे ही लौरिया से बीजेपी विधायक विनय बिहारी का नाम पुकारा गया, सदन में उत्सुकता बढ़ गई।
विनय बिहारी ने प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव से पूछा कि क्या वह भोजपुरी में शपथ ले सकते हैं। स्पीकर ने इसकी अनुमति दे दी। लेकिन, विनय बिहारी ने शपथ शुरू करने के बजाय, भोजपुरी भाषा की महत्ता और गाथा सुनाना शुरू कर दिया।
कविता सुनाने पर नोकझोंक
उनके कविता पाठ शुरू करते ही प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव ने उन्हें तुरंत टोक दिया। स्पीकर ने कहा, “जो आपको दिया गया है, उसे पढ़िए।” इस पर विधायक विनय बिहारी ने पलटकर सवाल किया: “शपथ तो लेंगे ही, लेकिन भोजपुरी कविता नहीं पढ़ सकता क्या? भोजपुरी 32 जिलों की भाषा है, इसे भी सम्मान मिलना चाहिए। आप भोजपुरी को दर्जा नहीं देना चाहते क्या?”
विनय बिहारी, जो गायक के रूप में भी जाने जाते हैं, ने कुछ सदस्यों की आपत्ति के बाद साफ कहा, “मैं गायक बनकर ही विधायक बना हूं।” हालांकि, नोकझोंक के बावजूद, उन्होंने अंततः हिंदी में ही शपथ ली। उनके इस प्रयास ने सदन में क्षेत्रीय भाषा और उसके संवैधानिक दर्जे की आवश्यकता पर एक क्षणिक बहस छेड़ दी।
संस्कृत में शपथ और अनुपस्थित सदस्य
विनय बिहारी के बाद, विधायक जीवेश मिश्रा ने संस्कृत में शपथ लेकर सदन में एक अलग ही आध्यात्मिक और पारंपरिक माहौल बना दिया। दूसरी ओर, कुचायकोट से अमरेंद्र कुमार पांडेय और मोकामा से बाहुबली नेता अनंत सिंह सदन से दूसरे दिन भी अनुपस्थित रहे, जिसके कारण दोनों विधायक शपथ नहीं ले पाए। यह सत्र 1 से 5 दिसंबर 2025 तक चलेगा।