बिहार बजट सत्र की शुरुआत में ही नीतीश-तेजस्वी की नजदीकियों ने बढ़ाया सियासी पारा, विधानसभा की इस तस्वीर ने जीता सबका दिल

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानमंडल के बजट सत्र का आगाज़ आज भले ही राजनीतिक गहमागहमी और हंगामे के साथ हुआ हो, लेकिन सदन के भीतर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने कड़वाहट भरी राजनीति के बीच शिष्टाचार की नई मिसाल पेश की। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सेंट्रल हॉल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव न केवल साथ बैठे दिखे, बल्कि उनके बीच हुई लंबी बातचीत ने सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाज़ार गर्म कर दिया है।

आमने-सामने नहीं, बगल में दिखे दिग्गज
विधानसभा के सेंट्रल हॉल में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान जब बिहार सरकार की उपलब्धियों और भविष्य का खाका पेश कर रहे थे, तब अग्रिम पंक्ति (Front Row) में सत्ता पक्ष और विपक्ष के शीर्ष नेता मौजूद थे। प्रोटोकॉल के अनुसार, तेजस्वी यादव विपक्ष की पहली कतार में बैठे थे, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सत्ता पक्ष की ओर से ठीक उनके बगल वाली सीट पर विराजमान थे।

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अभिवादन और हाल-चाल का दौर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सत्र की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को टोकते हुए उनका विनम्रतापूर्वक अभिवादन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी गर्मजोशी दिखाते हुए तेजस्वी की तरफ रुख किया और उनसे बातचीत शुरू की। चूंकि तेजस्वी यादव पैर में चोट के कारण व्हीलचेयर पर सदन पहुंचे थे, ऐसे में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उनके स्वास्थ्य और चोट के बारे में जानकारी ली।

अन्य सदस्यों की टिकी रहीं निगाहें
दोनों नेताओं के बीच चल रही इस अनौपचारिक बातचीत ने वहां मौजूद दोनों उपमुख्यमंत्रियों—विजय कुमार सिन्हा और सम्राट चौधरी—का ध्यान भी अपनी ओर खींचा। सदन के अन्य सदस्य और मंत्री भी बड़े गौर से इस ‘चाचा-भतीजे’ की जोड़ी को आपस में मुस्कुराकर बात करते देख रहे थे। बिहार की राजनीति में जहां एक ओर शब्दों के बाण चलते हैं, वहीं सार्वजनिक रूप से दो प्रतिद्वंद्वियों के बीच यह सहज संवाद एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

क्या हैं इसके सियासी मायने?
हालांकि, इसे केवल शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन बिहार की बदलती राजनीति में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की हर मुलाकात के अपने मायने होते हैं। राज्यपाल के अभिभाषण में जहाँ सरकार की तारीफें हो रही थीं, वहीं इन दोनों नेताओं की केमिस्ट्री ने मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों को अटकलें लगाने का एक और मौका दे दिया है।

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