पप्पू यादव ने हाल ही में राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और नेताओं के व्यवहार को लेकर एक विवादित टिप्पणी की, जिससे व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं के लिए बिना किसी समझौते के राजनीति में आगे बढ़ना मुश्किल है और यह भी कहा कि बड़ी संख्या में महिलाओं का राजनीतिक सफर प्रभावशाली नेताओं के साथ व्यक्तिगत संबंधों से शुरू होता है। उनके इस बयान की काफी आलोचना हो रही है।

दरअसल, यह टिप्पणी उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संदर्भ में दी, जहां उन्होंने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने के बजाय केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को उठाया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने नेताओं के निजी आचरण पर भी सवाल उठाते हुए मोबाइल फोन की जांच तक की बात कही। इस बयान के बाद मामला और तूल पकड़ गया है। बिहार राज्य महिला आयोग ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पप्पू यादव को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के आधार पर की गई, जिसमें उनके बयान को महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बताया गया है।
आयोग ने सांसद से तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है और चेतावनी दी है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। आयोग का कहना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के ऐसे बयान समाज पर नकारात्मक असर डालते हैं और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। इसके साथ ही, यह भी संकेत दिया गया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो मामले को आगे बढ़ाते हुए लोकसभा के अध्यक्ष से भी इस पर कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।