सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच कटिहार जिला राजनीतिक विश्लेषण और जातीय समीकरणों की वजह से खासा चर्चा में है। जिले की कुल 7 विधानसभा सीटों में से 3 पर फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कब्जा है, लेकिन आगामी चुनाव में बीजेपी के लिए इन सीटों को बचाए रखना आसान नहीं होगा।
कटिहार जिले की सीटें – कटिहार, बरारी, प्राणपुर, मनिहारी, बलरामपुर, कदवा और कोढ़ा – का सियासी मिजाज बेहद विविधतापूर्ण रहा है। कभी कांग्रेस का गढ़ रहा यह जिला अब भाजपा, कांग्रेस, जेडीयू और वाम दलों के लिए समान रूप से चुनौती और अवसर दोनों बन चुका है।
पिछले चुनाव की बात करें तो बीजेपी ने कटिहार, प्राणपुर और कोढ़ा सीट पर कब्जा जमाया था। कांग्रेस को कदवा और मनिहारी में सफलता मिली, जबकि बरारी जेडीयू और बलरामपुर भाकपामाले के खाते में गई। अब 2025 में इन सीटों पर समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक भूमिका
कटिहार जिले की आबादी में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी कई सीटों पर निर्णायक है – प्राणपुर (लगभग 47%), मनिहारी (38.9%), कोढ़ा (31.5%), बरारी (29.8%) और कदवा (32%)। यह आंकड़े बताते हैं कि यदि मुस्लिम वोटों का बिखराव रोका गया, तो बीजेपी के लिए अपनी पुरानी सीटों को बचाना मुश्किल हो सकता है।
जातीय समीकरणों का नया संतुलन
कदवा और कोढ़ा जैसे क्षेत्रों में ईबीसी (Extremely Backward Classes), ओबीसी और एससीएसटी की मजबूत उपस्थिति भी चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। कांग्रेस और राजद जैसे दल इन वर्गों को अपने पाले में लाने के प्रयास में जुटे हैं।
प्रमुख चेहरे और क्षेत्रीय प्रभाव
कटिहार सीट पर चार बार से बीजेपी विधायक तारकिशोर प्रसाद का दबदबा है, लेकिन लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण एंटीइनकंबेंसी फैक्टर भी उभर सकता है। वहीं कदवा से कांग्रेस के शकील अहमद खान की मजबूत पकड़ और मनिहारी से मनोहर प्रसाद सिंह की लोकप्रियता कांग्रेस के लिए संजीवनी बन सकती है। बलरामपुर में अब तक किसी राष्ट्रीय पार्टी को जीत नहीं मिली है – यह सीट भाकपामाले के महबूब आलम के पास है।
राजनीतिक इतिहास और प्रभाव
कटिहार का राजनीतिक इतिहास कांग्रेस नेता तारिक अनवर और पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी जैसे दिग्गजों से जुड़ा रहा है। हालांकि, पिछले दो दशकों में बीजेपी और अन्य दलों ने अपनी जमीन मजबूत की है। जातीय और धार्मिक समीकरणों का नया संतुलन इस बार कई सीटों पर परिणाम बदल सकता है।
BJP को जहां अपनी मौजूदा सीटें बचाने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस और महागठबंधन को वोटों का बिखराव रोककर जीत की उम्मीद है। जातीय गणित, मुस्लिम वोट बैंक और स्थानीय उम्मीदवारों का कद – ये तीन कारक कटिहार की सियासी दिशा तय करेंगे।