सड़क दुर्घटना मुआवज़ा देने में बिहार देश में बेहतर : गंभीर चोट पर ₹50 हजार, मृत्यु पर ₹2 लाख

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
सड़क दुर्घटनाओं में घायल या मारे गए लोगों को मुआवजा देने के मामले में बिहार ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। यह जानकारी शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता में एडीजी (ट्रैफिक) सुधांशु कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि इस सफलता के पीछे मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) की प्रभावी व्यवस्था और पुलिस द्वारा समय पर कार्रवाई करना है।

मुआवजा वितरण की स्थिति
एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि मोटर दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा देने की योजना के तहत गंभीर चोट लगने पर ₹50,000 और मृत्यु होने पर ₹2 लाख देने का प्रावधान है। पिछले डेढ़ से दो साल में, 1626 मामलों में पीड़ितों को ₹84 करोड़ 19 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। हिट एंड रन से जुड़े 9,080 मामले अंतिम अनुमति के लिए जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) को भेजे गए हैं, जिनमें से अब तक 5,830 मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिया जा चुका है।एडीजी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में त्वरित और न्यायसंगत मुआवजा सुनिश्चित करने में बिहार ने सराहनीय प्रदर्शन किया है।

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MACT की स्थापना और त्वरित निपटान
सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करने के लिए 10 जिलों में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) का गठन किया गया है। इन जिलों में पटना, सारण, पूर्णिया, गयाजी, डेहरी, सहरसा, मुंगेर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और भागलपुर शामिल हैं।

निपटारे का समय: इन न्यायाधिकरणों में मामलों का निपटारा 6 महीने, 9 महीने और अधिकतम 12 महीने में पूरा करने का प्रावधान किया गया है। एडीजी ने आम जनता से अपील की कि उन्हें MACT (Motor Accident Claims Tribunal) के बारे में समुचित जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि यह व्यवस्था दुर्घटना पीड़ितों को न्याय और आर्थिक सहायता दिलाने के लिए ही बनाई गई है।

पुलिस की जिम्मेदारी और ‘हिट एंड रन’ मामले
एडीजी ने दुर्घटना के बाद पुलिस की जिम्मेदारी पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाएँ दो श्रेणियों की होती हैं:

  1. वह जिसमें चालक का पता चल जाता है।
  2. वह जिसमें चालक का पता नहीं चलता है, जिन्हें ‘हिट एंड रन’ के तहत दर्ज किया जाता है।

पुलिस की भूमिका:

किसी भी दुर्घटना के मामले में, थाना स्तर पर फॉर्म-3 भरकर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पुलिस की है। इसके अलावा, 90 दिनों में विस्तृत एक्शन रिपोर्ट (चार्जशीट) दायर करने का नियम है। अंतरिम दुर्घटना रिपोर्ट फॉर्म-5 में भरकर देने का भी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि जहां ‘हिट एंड रन’ मामलों का राष्ट्रीय औसत 25 फीसदी है, वहीं बिहार में भी यह औसत 25 फीसदी पर बना हुआ है, लेकिन मुआवजे के त्वरित वितरण में बिहार ने राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व किया है।

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