सिटी पोस्ट लाइव : पटना HC ने गुरुवार को बीपीएससी की 70वीं परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों पर सुनवाई के बाद आयोग और सरकार को तगड़ा झटका दिया है. न्यायाधीश अरविंद सिंह चंदेल ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे गंभीर हैं .किन फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती. आयोग और राज्य सरकार को 30 जनवरी तक विस्तृत जवाब देने का निर्देश देते हुए कोर्ट ने कहा कि . परीक्षा के परिणामों को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा जब तक कि अंतिम निर्णय नहीं हो जाता.
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता वाईवी गिरि ऐवं प्रणव कुमार ने कोर्ट को बताया कि परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर प्रश्न पत्र समय से पहले लीक हो गए थे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित किए गए. पटना के बापू परीक्षा परिसर में 13 दिसंबर को आयोजित परीक्षा में लगभग 12,000 उम्मीदवारों ने भाग लिया. प्रश्न पत्र लीक होने की घटना लगभग 1:06 बजे सोशल मीडिया पर सामने आई.परीक्षा केंद्रों पर जामर भी ठीक से काम नहीं कर रहे थे. स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर का पालन नहीं किया गया. परीक्षा से एक दिन पहले कई उम्मीदवारों के केंद्र बदल दिए गए.
बापू परीक्षा परिसर में अनियमितताओं के चलते आयोग ने 4 जनवरी 2025 को पुनर्परीक्षा आयोजित की जो अनुचित था. उन्होंने कहा कि 4 जनवरी को हुई पुनर्परीक्षा में प्रश्न संख्या 13, 79 और 91 हटा दिए गए थे, जिससे उस दिन परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अंक मिलने का लाभ हुआ.राज्य के महाधिवक्ता पीके शाही और आयोग के वरीय अधिवक्ता ललित किशोर ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों का खंडन किया. आयोग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 13 दिसंबर को बापू परीक्षा परिसर में एक उम्मीदवार ने प्रश्न पत्र लेकर भागने का प्रयास किया था, जिससे सोशल मीडिया पर प्रश्न साझा होने की संभावना बनी. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 31 जनवरी को निर्धारित की है.
13 दिसंबर 2024 और 4 जनवरी 2025 को आयोजित परीक्षा के परिणामों को प्रकाशित करने पर रोक लगाई जाए।.परीक्षा में हुई अनियमितताओं को देखते हुए इन परीक्षाओं को रद्द किया जाए.परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों के लिए एक नई और निष्पक्ष प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाए.यदि याचिकाकर्ताओं की मांगें स्वीकार की जाती हैं, तो बीपीएससी को एक नई प्रारंभिक परीक्षा आयोजित करनी पड़ सकती है, जिससे हजारों उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित होगा. परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए यह मामला महत्वपूर्ण है.