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पटना: सचिन पायलट, जिग्नेश मेवाणी के बाद, बिहार में 19 को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आ रहे हैं। क्यों आ रहे हैं खड़गे साहब, इसका जवाब बहुत गहरा है। दरअसल, राहुल गांधी यूं ही डीसीसी-डीसीसी नहीं कर रहे हैं, कांग्रेस पार्टी ने फ़ैसला ले लिया है कि किसी हाल में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में संगठन को मज़बूत करना है और इसमें डीसीसी यानि डिस्ट्रिक्ट कांग्रेस कमेटी की बड़ी भूमिका होगी। कांग्रेस चाहती है कि इस बार बिहार में किसी एक शख्स को मज़बूत करने के बजाए जिलाध्यक्षों के हाथ में ताकत दी जाए।
इस बार बिहार में टिकट बांटने में जिलाध्यक्षों और जिले की कमेटियों की बड़ी भूमिका होने जा रही है। मल्लिकार्जुन खड़गे इसीलिए आ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में बिहार में DCC निष्क्रिय हो गई हैं क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि बड़े नेता अपने करीबियों और वफादारों को जिला अध्यक्ष बनाने के लिए लॉबिंग करते हैं और जिला अध्यक्ष DCC में अपनी पसंद के लोगों को जगह दे देते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि कांग्रेस अब क्या करने जा रही है? इसका जवाब यह है कि कांग्रेस अब हर जिले में एक राजनीतिक मामलों की समिति गठित करेगी। इस समिति में पार्टी के प्रमुख नेताओं को शामिल किया जाएगा, जो टिकट बांटने की प्रक्रिया में शामिल होंगे। कांग्रेस की एक कोशिश यह भी है कि हर जिले के लिए एक पैनल बनाया जाए जिसमें AICC से एक ऑब्जर्वर और राज्य कांग्रेस के चार नेताओं को शामिल किया जाए।
पार्टी यह चाहती है कि ‘सबसे योग्य नेता’ को जिला अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। इसलिए सूत्रों के मुताबिक कुछ जिलोंं में अभी जिलाध्यक्ष बदले जा सकते हैं। बचे पुराने जिलाध्यक्षों को हटाया जा सकता है। कांग्रेस उम्मीदवारों के चयन में जिला अध्यक्षों को भी शामिल करना चाहती है। ऐसे में जिला अध्यक्ष केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की बैठकों का हिस्सा बनेंगे। यही समिति उम्मीदवारों का फैसला करती है। खड़गे 19 और 20 अप्रैल को दो दिन बिहार में रहेंगे। वे बक्सर जाएंंगे, साथ ही पटना में कांग्रेस के नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ समय बिताएंगे और बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम और प्रभारी कृष्णा अल्लावरु को डीसीसी को मज़बूत करने का निर्देश देकर जाएंगे।