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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के दौरे पर हैं, जहां वे ₹34,200 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। यह दौरा विशेष रूप से देश के समुद्री क्षेत्र के विकास पर केंद्रित है, जिसका प्रमुख कार्यक्रम ‘समुद्र से समृद्धि’ भावनगर में आयोजित किया जा रहा है। इस दौरे का उद्देश्य भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और विरासत को विकास के साथ जोड़ना है।
समुद्री क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
इस दौरे के दौरान, समुद्री क्षेत्र से जुड़ी ₹7,870 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा। इनमें प्रमुख बंदरगाहों जैसे मुंबई, कोलकाता, पारादीप और कांडला में नए टर्मिनल और कार्गो हैंडलिंग सुविधाओं के निर्माण कार्य शामिल हैं। इसके अलावा, चेन्नई और कार निकोबार द्वीप में तटीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण पहल शुरू की जाएंगी। इन परियोजनाओं का लक्ष्य भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार के मानचित्र पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना है।
गुजरात के लिए विकास की सौगात
प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के लिए भी ₹26,354 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। ये परियोजनाएं विभिन्न क्षेत्रों को कवर करती हैं, जिनमें इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सेवा, शहरी परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) शामिल हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में, वे भावनगर में सर टी. जनरल अस्पताल और जामनगर में गुरु गोविंद सिंह सरकारी अस्पताल के विस्तार कार्यों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इन विस्तारों से राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में काफी सुधार होने की उम्मीद है, जिससे आम जनता को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
विरासत और विकास का संगम
प्रधानमंत्री के इस दौरे का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा धोलेरा का हवाई सर्वेक्षण और लोथल में बन रहे राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (National Maritime Heritage Complex) का दौरा है। लगभग ₹4,500 करोड़ की लागत से बन रहा यह परिसर भारत की प्राचीन समुद्री परंपराओं और इतिहास को प्रदर्शित करेगा। इसे पर्यटन, अनुसंधान और शिक्षा के एक वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह पहल ‘विरासत भी, विकास भी’ के दृष्टिकोण को दर्शाती है, जहां देश अपनी समृद्ध संस्कृति को संरक्षित करते हुए आधुनिक प्रगति की ओर अग्रसर है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल गुजरात के लिए एक बड़ा आर्थिक प्रोत्साहन है, बल्कि यह भारत के समग्र समुद्री क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।