पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे डॉ. शकील अहमद के पटना तथा मधुबनी स्थित आवासों की सुरक्षा व्यवस्था को अचानक बढ़ा दिया गया है। यह कदम तब उठाया गया, जब उन्हें अपने घरों पर संभावित हमले की सूचना मिली।
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद शकील अहमद ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के कुछ समय बाद एक इंटरव्यू में उन्होंने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और उन्हें “डरपोक” तथा “इनसिक्योर” नेता करार दिया। शकील अहमद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी मजबूत और अनुभवी नेताओं को आगे नहीं आने देते, बल्कि केवल अपने करीबियों को ही तरजीह देते हैं। इस बयान से कांग्रेस में हलचल मच गई और पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी। शकील अहमद ने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ पुराने साथियों ने उन्हें गुप्त रूप से सूचित किया है कि राहुल गांधी के इशारे पर युवा कांग्रेस और अन्य कार्यकर्ता उनके पटना (फुलवारी शरीफ) और मधुबनी के आवासों पर हमला कर सकते हैं। उन्होंने एक व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें कथित तौर पर पार्टी के जिला और विधानसभा स्तर के नेताओं को उनके पुतले जलाने और विरोध दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
इस आशंका के बाद शकील अहमद ने बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया। सूचना मिलते ही पटना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और उनके दोनों आवासों पर सुरक्षा बढ़ा दी। फिलहाल उनके घरों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है, जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि थाना स्तर से प्राप्त निर्देश के बाद अतिरिक्त बल लगाया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है और सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। शकील अहमद ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध राहुल गांधी के नेतृत्व से है, न कि पूरी कांग्रेस पार्टी से। उन्होंने कहा कि वे तीन पीढ़ियों से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं, लेकिन अब पार्टी के भीतर लोकतंत्र की कमी और नेतृत्व की मनमानी से दुखी हैं। इस घटना ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां कांग्रेस आंतरिक कलह और पूर्व नेताओं के असंतोष से जूझ रही है।