क्या ममता बनर्जी की पार्टी
सिटी पोस्ट लाइव : अरविंद केजरीवाल के बाद अब बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की नजर बिहार पर है. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस बिहार में चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है.टीएमसी के बिहारी मूल के दो सांसद शत्रुघन सिन्हा और कीर्ति झा आजाद बिहार चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे.बिहार में कायस्थ और ब्राह्मण वोटों का बंटवारा कर ममता बनर्जी किसका खेल खराब करेगीं.
पश्चिम बंगाल में जिस तरह से टीएमसी ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी, बिहार में भी खेल कर सकती है. ममता बनर्जी का ब्रह्माण होना और बिहार के एक टीएमसी सांसद कीर्ति झा आजाद का ब्राह्मण होना कुछ फर्क डाल सकता है. शत्रुघन सिन्हा कायस्थ जाति से आते हैं तो हो सकता है कि पटना के आस-पास के इलाकों में उनका कुछ प्रभाव हो. क्योंकि, टीएमसी और आरजेडी में रिश्ता बहुत अच्छा है और बीते पश्चिम बंगाल चुनाव में तेजस्वी यादव ने टीएमसी के पक्ष में प्रचार किया था. ऐसे में टीएमसी की बिहार में चुनाव लड़ने की संभावना कम ही नजर आती है.
शत्रुघ्न सिन्हा, जो बिहार के मशहूर अभिनेता और राजनेता हैं, वर्तमान में टीएमसी के सांसद हैं और आसनसोल से 2024 का लोकसभा चुनाव जीते हैं. बिहार में उनकी गहरी लोकप्रियता और राजनीतिक अनुभव उन्हें एक प्रभावशाली शख्सियत बनाता है. सिन्हा दिल्ली विधानसभा चुनावों में आप के लिए भी प्रचार कर चुके हैं. यह उनकी सक्रियता और गठबंधन-आधारित रणनीति को दर्शाता है. अगर टीएमसी बिहार में उतरती है तो सिन्हा प्रचार में अहम भूमिका निभा सकते हैं. उनकी बिहारी पहचान और स्टार पावर मतदाताओं को आकर्षित कर सकती है.
कीर्ति झा आजाद, 1983 की विश्व कप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य, 2024 में पश्चिम बंगाल के बर्दमान-दुर्गापुर से टीएमसी के टिकट पर लोकसभा सांसद बने हैं. बिहार से उनका गहरा नाता है. राज्य के पूर्व सीएम भागवत झा आजाद के पुत्र हैं. बीजेपी के टिकट पर दरभंगा से सांसद भी रह चुके हैं. 2025 के बिहार चुनावों में उनकी भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है. अगर टीएमसी बिहार में चुनाव लड़ती है तो आजाद की खेल और राजनीतिक पृष्ठभूमि पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकती है. उनकी बिहारी जड़ें और टीएमसी में नया जोश उन्हें प्रचार या रणनीति में महत्वपूर्ण बना सकता है.
बिहार में 2025 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है. एनडीए और महागठबंधन में अभी तक मुख्य लड़ाई है. इसको जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर त्रिकोणीय बना रहे हैं. ऐसे में अगर आम आदमी पार्टी और टीएमसी जैसी पार्टियां आती हैं तो वोटों का बड़ा बिखराव होगा. इससे यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाएगा कि किस गठबंधन की सरकार बनेगी.