शराब माफ़ियाओं का तांडव, पुलिस पर फिर हमला, एक जवान शहीद, दूसरा गंभीर घायल.

City Post Live

सिटी पोस्ट लाइव :एकबार फिर से गोपालगंज ज़िले में एकबार फिर से पुलिस पर हमला हुआ है. विश्वंभरपुर थाना क्षेत्र के सिपाया पॉलिटेक्निक के पास शराब तस्करों ने उत्पाद विभाग की टीम पर हमला बोल दिया. इस घातक हमले में एक होमगार्ड जवान ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है..शनिवार की देर शाम उत्पाद विभाग की टीम इलाके में शराब तस्करों का पीछा कर रही थी. कर्तव्य निभाते हुए जवानों ने जैसे ही तस्करों की गाड़ी को घेरना चाहा, उसी वक्त अपराधियों ने जानलेवा वारदात को अंजाम दे डाला. पहले ज़ोरदार धक्का, फिर बेरहमी से कुचलने की कोशिश—इस अचानक हुए हमले में एक जवान की सांसें वहीं थम गईं.दूसरे जवान की हालत गंभीर है और उसे नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति नाज़ुक बनी हुई है.

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शराबबंदी वाले बिहार में तस्करों का यह खुलेआम हमला इस बात का प्रमाण है कि शराब माफ़ियाओं का नेटवर्क कितना मजबूत और निडर हो चुका है. वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी मौके से फरार हो गए और इलाके में दहशत का माहौल पसर गया.वारदात की सूचना मिलते ही उत्पाद अधीक्षक अमृतेश कुमार भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. इलाके की नाकेबंदी कर दी गई है और फरार तस्करों की तलाश में सघन छापेमारी जारी है. पुलिस का दावा है कि अपराधियों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा, लेकिन फिलहाल हालात यह साफ बताते हैं कि गोपालगंज शराब तस्करों के लिए अभयारण्य बन चुका है.

कर्तव्य पथ पर डटे होमगार्ड जवान की शहादत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर कब तक शराब माफ़ियाओं की गोलियों और हमलों में ईमानदार सिपाही अपनी जान गंवाते रहेंगे? क्या सरकार की शराबबंदी महज़ कागज़ों पर है? और अगर मंत्री और अफसरों के गृह ज़िले में ही कानून के रखवालों को मौत के घाट उतार दिया जा रहा है, तो आम आदमी की सुरक्षा किस भरोसे है?

गोपालगंज की यह वारदात महज़ एक हमला नहीं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक विफलता की गवाही है. एक ओर पुलिस तंत्र शराबबंदी के नाम पर रोज़ाना दावा ठोंकता है, वहीं दूसरी ओर तस्करों का गिरोह खून बहाने से भी पीछे नहीं हटता.यह घटना साफ़ बता रही है बिहार में शराबबंदी नहीं, शराब माफ़ियाओं का साम्राज्य चल रहा है। और इसकी सबसे भारी क़ीमत चुकानी पड़ रही है वर्दीधारी जवानों को.

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