बिहार के पूर्णिया जिले में एक 10वीं की छात्रा की नृशंस हत्या का मामला सामने आया है। मुख्य आरोपी सचिन साह (22 वर्ष) ने पुलिस हिरासत में जो खुलासे किए हैं, वे मानवता को शर्मसार करने वाले हैं।

मुख्य आरोपी का कबूलनामा;
मुख्य आरोपी सचिन, जो स्कूल के पास चाय-नाश्ते की दुकान चलाता था। उसने पुलिस को बताया कि उनका एक साल से अफेयर था। और उसे छिपकर बात करने के लिए मोबाइल भी दिया था। साजिश के तहत 11 मार्च को सचिन उसे मेला घुमाने के बहाने घर से बुलाकर कार में ले गया। सचिन के अनुसार, जब लड़की ने शारीरिक संबंध बनाने से मना किया, तो उसने अपने 4 दोस्तों के साथ मिलकर उसके साथ गैंगरेप किया। हालांकि, जब पीड़िता ने घर जाकर सब बता देने की धमकी दी, तो पकड़े जाने के डर से सचिन और उसके साथियों ने मिलकर उसका गला घोंट दिया। लाश की पहचान न हो सके, इसके लिए आरोपियों ने एसिड की 15 बोतलों का इस्तेमाल कर शव को बुरी तरह जला दिया और मक्के के खेत में फेंक दिया।

परिजनों का पक्ष;
पीड़िता की मां और भाई ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि 11 मार्च की रात करीब 10 बजे लड़की ने अपनी मां से कंप्यूटर सीखने की इच्छा जताई थी। इसके कुछ देर बाद वह वॉशरूम जाने के बहाने निकली और फिर कभी नहीं लौटी। वहीं, परिजनों ने 12 मार्च को FIR दर्ज कराई। सहेलियों से पूछताछ में सचिन का नाम सामने आया, लेकिन वह लगातार पुलिस को गुमराह करता रहा। लड़की के भाई ने अपना दर्द जाहिर करते हुए कहा- “मेरी बहन का मैट्रिक का पेपर अच्छा गया था, वह फर्स्ट डिवीजन आने वाली थी। अब हम उसके रिजल्ट का क्या करेंगे? हमें बस इंसाफ और दोषियों को फांसी चाहिए।”

पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति;
19 मार्च को जब पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन खंगाली, तो सचिन का झूठ पकड़ा गया। सख्ती से पूछताछ के बाद उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। 20 मार्च की सुबह NH-31 के पास एक खेत से क्षत-विक्षत शव मिला। शव इतना गल चुका था कि पहचान कपड़ों से करनी पड़ी। डॉक्टरों के अनुसार शव 10 दिन पुराना है और सड़ चुका है। DNA टेस्ट के लिए हड्डियां सुरक्षित रखी गई हैं। घटना के विरोध में हजारों ग्रामीणों ने NH-31 जाम कर टायर जलाए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।