केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने सोमवार को पटना के विद्यापति भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर अपनी राय रखी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्योंकि यह चुनाव विधायकों के मतों पर आधारित है, इसलिए विपक्ष से किसी विशेष चर्चा की आवश्यकता नहीं है। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह से अपने बेहतर संबंधों का हवाला देते हुए खुद को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की उम्मीद जताई।
महाबोधि मंदिर ट्रस्ट पर अठावले का रुख;
अठावले ने बोधगया के विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण मांग उठाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मंदिर का संचालन करने वाले ट्रस्ट में केवल बौद्ध समुदाय के प्रतिनिधियों को ही शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह हिंदू मंदिरों के ट्रस्ट का नेतृत्व हिंदू करते हैं, उसी तरह बौद्ध मंदिरों की जिम्मेदारी भी बौद्धों के पास होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि दूसरे धर्म के लोगों को इस विशिष्ट धार्मिक ट्रस्ट का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
राज्यसभा चुनाव का समीकरण (बिहार और महाराष्ट्र);
| क्षेत्र | कुल सीटें | अठावले का दावा | टिप्पणी |
| बिहार | 5 | कम से कम 4 सीटें | पांचवीं सीट पर स्थिति के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। |
| महाराष्ट्र | 7 | 6 सीटें (महायुति) | 4 भाजपा, 1 एकनाथ शिंदे गुट और 1 अजित पवार गुट। |
विरोध प्रदर्शनों पर तीखी प्रतिक्रिया;
हाल ही में AI समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए ‘अमर्यादित’ विरोध प्रदर्शन पर मंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा- ऐसे कृत्यों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि धूमिल होती है। वहीं, वैश्विक मंचों पर इस तरह के प्रदर्शन देश के लिए शर्मिंदगी का कारण बनते हैं।