करीब तीन दशक तक बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले नितिन नवीन का इस सीट से अब औपचारिक तौर पर रिश्ता खत्म हो गया है। राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने 30 मार्च को विधानसभा स्पीकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसके बाद यह सीट खाली हो गई। नियम के अनुसार, अगले 6 महीनों के भीतर यहां उपचुनाव होना तय है।

नितिन नवीन के इस्तीफे के साथ ही बांकीपुर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के भीतर ही कई बड़े नेता इस सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुट गए हैं। सांसद, पूर्व विधायक और कई प्रभावशाली परिवारों के सदस्य अपने-अपने स्तर पर टिकट के लिए प्रयास कर रहे हैं। सबसे प्रमुख दावेदारों में संजय मयूख का नाम सामने आ रहा है। वे बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी हैं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, खासकर अमित शाह की कोर टीम के सदस्य माने जाते हैं। साथ ही नितिन नवीन के भी वे करीबी माने जाते हैं। मयूख का इस सीट से पुराना जुड़ाव रहा है। 1995 में जब नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा पहली बार यहां से विधायक बने थे, तब से ही मयूख सक्रिय रूप से उनके साथ जुड़े रहे। वर्तमान में संजय मयूख 2016 से विधान परिषद के सदस्य हैं और जून 2026 में उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी उन्हें तीसरी बार परिषद भेजने के बजाय विधानसभा चुनाव मैदान में उतार सकती है। यह भी चर्चा है कि कायस्थ प्रतिनिधित्व के तहत उन्हें भविष्य में मंत्री पद भी दिया जा सकता है।

दूसरे मजबूत दावेदार के रूप में अजय आलोक का नाम लिया जा रहा है। वे राष्ट्रीय मीडिया में बीजेपी के मुखर चेहरों में गिने जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। दरअसल, उन्होंने 2005 और 2010 में अलग-अलग दलों से चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। 2012 में वे नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में शामिल हुए और प्रवक्ता व महासचिव बने। बाद में 2023 में बीजेपी में शामिल होकर राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हो गए। हालांकि फिलहाल उन्होंने चुनाव लड़ने को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है और इसे पार्टी का निर्णय बताया है। तीसरे संभावित उम्मीदवार के तौर पर रणवीर नंदन का नाम भी चर्चा में है। वे वर्तमान में धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष हैं और पहले जेडीयू से विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। एक समय वे नीतीश कुमार के करीबी माने जाते थे, लेकिन 2023 में उन्होंने जेडीयू छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि यदि पार्टी टिकट देती है तो वे चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।

इसके अलावा, राजनीतिक परिवारों के युवा चेहरे भी इस सीट पर नजर बनाए हुए हैं। खासकर पूर्व विधायक अरुण सिन्हा के बेटे आशीष सिन्हा का नाम सामने आ रहा है, जो पहले पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके पिता भी उनके लिए पार्टी नेतृत्व के सामने पैरवी कर रहे हैं। गौरतलब है कि बांकीपुर सीट अब बीजेपी के भीतर ही एक बड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताती है और किसे इस प्रतिष्ठित सीट से चुनावी मैदान में उतारती है।