भारत की प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियों—ब्लिंकिट (Blinkit), स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) और जेप्टो (Zepto) ने अपनी मार्केटिंग रणनीति से ’10 मिनट’ का दावा हटाने का फैसला किया है। यह कदम सरकार के सख्त रुख, डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद उठाया गया है।
सरकार के साथ बैठक;
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में इन कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें तीन महत्वपूर्ण बातों पर सहमति बनी:
1) सुरक्षा सर्वोपरि: श्रम मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी कंपनी का बिजनेस मॉडल वर्कर्स की जान जोखिम में डालकर नहीं चलना चाहिए।
2) दबाव में कमी: ’10 मिनट’ की समय सीमा न केवल राइडर्स के लिए खतरनाक है, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए भी जोखिम पैदा करती है।
3) भ्रामक विज्ञापनों पर रोक: कंपनियां अब ग्राहकों से समय सीमा का वादा करने वाले आक्रामक विज्ञापन नहीं करेंगी।
बदलाव की मुख्य वजहें;
– सड़क सुरक्षा: विशेषज्ञों का मानना है कि 10-15 मिनट का दबाव राइडर्स को ट्रैफिक नियम तोड़ने और तेज गाड़ी चलाने के लिए मजबूर करता है।
– गिग वर्कर्स का कल्याण: सरकार अब गिग वर्कर्स (Gig Workers) के लिए सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कार्य परिस्थितियों पर एक व्यापक पॉलिसी बनाने की तैयारी में है।
– आलोचना और दबाव: सोशल मीडिया और सड़क सुरक्षा संगठनों ने लगातार इस मॉडल की आलोचना की थी, जिसके बाद सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा।
कंपनियों का क्या कहना है?
हालांकि कंपनियों ने विज्ञापनों से ‘समय का दावा’ हटाने का वादा किया है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वे अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी (कार्यक्षमता) को कम नहीं करेंगी। उनका लक्ष्य यह है कि वे अपनी तकनीक और स्टोर नेटवर्क के जरिए तेज डिलीवरी जारी रखें, लेकिन विज्ञापनों के माध्यम से ग्राहकों में ऐसी ‘अवास्तविक उम्मीद’ न जगाएं जिससे राइडर्स पर मानसिक या शारीरिक दबाव बने।